
मुंबई, इंडिया
अपने बेडरूम के गेट पर दर्श खड़ा हुआ था , वो चुपचाप सामने देख रहा था , जहां ज़हन बेड के कॉर्नर से टिककर, फ्लोर पर बैठी रो रही थी , बहुत ज्यादा।
उसकी पीठ दर्श की तरफ थी , उसे इसका कोई अंदाजा नहीं था कि दर्श यहां पर होगा ।
वहीं दर्श बेहद शांत था, उसकी ऑफ व्हाइट शर्ट, खून से सनी हुई थी, चेहरे पर खून के छीटें थे, इस वक्त उसे कोई भी देखता, तो पता नहीं उसकी क्या हालत होती । उसके बाल बिखरे हुए थे, आँखें हल्की लाल हो चुकी थीं।
वो धीमे कदमों से अंदर की तरफ बढ़ा, किसी की आहट मिलते ही ज़हन का रोना सिसकियों में बदला , वो अपने आंसू कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी , क्योंकि कही न कहीं उसे अंदाजा था, की उसके पीछे दर्श था ।
दर्श के हाथों की मुट्ठियां बन चुकी थी, उसे अंदाजा था कि ज़हन ने क्या देखा है , और वो क्यों इस तरह रो रही थी, उसका ऐसा रोना , उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
वो पंजों के बल नीचे, ठीक ज़हन के पीछे बैठा और बेहद गहरी सी आवाज में बोला," ज़हन!"
उसके इतना कहते ही ज़हन एक झटके से पीछे मुड़ी, और बिना कुछ देखे , बस एक झन्नाटेदार थप्पड़ दर्श को मार दिया।
दर्श का चेहरा एक तरफ झुक गया, वो कुछ भी नहीं बोला, वहीं ज़हन की क्रिस्टल ग्रे आईज में अब भी आंसू भरे हुए थे, पर इस वक्त उसे गुस्सा भी आ रहा था।
उसने तुरंत एक बार फिर दर्श के एक गाल पर दोबारा थप्पड़ मारा , दर्श इस बार भी कुछ नहीं बोला।
एक के बाद एक वो भी थप्पड़ मारती जा रही थी, पर दर्श के चेहरे पर एक शिकन भी नहीं थी , वो बिना किसी भाव के बस ज़हन के सामने बैठा था ।
ज़हन के खुद के हाथों में दर्द हुआ , आखिर में उसने दर्श का कॉलर अपने दोनों हाथों से पकड़ा और गुस्से से बोली," क्यों आए हो तुम मेरे पास दर्श? What the fuck are you doing here darsh? क्या समझते हो तुम खुद को ? क्या मैं इंसान नहीं हूं दर्श? क्यों तुम मेरे साथ खेल रहे हो? तब से जब से हम मिले हैं, तुमने हर चीज बर्बाद कर दी है दर्श.....क्या तुम्हें सच में कोई अंदाजा नहीं है इसका? कल तक मैं ये सोच रही थी कि जब तुम ठीक हो जाओगे, तब हम सब कुछ फिर से शुरू करेंगे....पर अब नहीं दर्श....मेरी जिंदगी की एक आखिरी उम्मीद भी तुमने छीन ली, तुम माफी के लायक कभी नहीं हो सकते दर्श .....!"
वो ये सब एक सांस में ही बोल गई थी, तेज तेज साँसे लेते हुए वो फिर बोली," I'll never forgive you for what you did to me !"
उसने दर्श का कॉलर इतनी मजबूती से पकड़ा हुआ था , की उसकी शर्ट के 2 बटन भी टूट गए थे ज़हन के खींचने से ही । ज़हन बस पागल हो चुकी थी , दर्द और गुस्सा उस पर इस कदर हावी हो चुका था ।
वो एक बार फिर चिल्लाते हुए बोली," you cheated on me darsh.....how could you? तुम इतना कैसे गिर गए दर्श?"
उसकी ये लाइन सुनते ही दर्श ने एकदम से अपने दोनों हाथों से उसका चेहरा पकड़ा, और उसकी आंखों में देखने लगा, उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस जो कुछ देर पहले तक शांत थे, वो एकदम से बदल गए।
उसका चेहरा ज़हन के चेहरे के बिल्कुल पास था , उसने ऐसे पकड़ा था उसे की ज़हन अपना चेहरा हिला भी नहीं पा रही थी ।
ज़हन दांत पीसते हुए बोली," don't touch me darsh .....!"
दर्श एक एक बात पर जोर देते हुए बोला," क्या कहा तुमने ज़हन, फिर से कहो....!"
ज़हन ने अपने हाथ दर्श के दोनों हाथों पर रख दिए, उसके नेल्स दर्श के हाथ में चुभ रहे थे , वो गहरी सांस लेते हुए बोली," I said you are a cheater, you......!"
वो अपनी बात पूरी कर पाती उससे पहले ही दर्श ने हल्के से उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए, वो किस नहीं कर रहा था , ज़हन चुप हो गई थी , पर उसकी आंखों में इस वक्त जो गुस्सा था वो बिल्कुल भी शांत नहीं हुआ था , उसकी आंखों से आंसू और ज्यादा तेजी से बहने लगे थे ।
दर्श हल्का सा उसके होठों से अलग हुआ और दांत पीसते हुए बोला," I can never cheat on you zahan ......I can never.....!"
उसके एक एक शब्द पर ज़ोर देने से ज़हन ने उसके हाथों पर पकड़ और ज्यादा मजबूत कर दी।
वो एक बार फिर गुस्से से बोली," वो क्या था जो मैंने अभी देखा?"
दर्श उसी तरह बोला," तुम्हारी आंखों का धोखा!"
ज़हन के होठों पर एक कड़वाहट भरी मुस्कान आ गई, वो धीरे से बोली," मैं नहीं मानती वो कोई धोखा था , तुम दोनों साथ थे , एक दूसरे.....के पास थे , क्यों?"
दर्श तुरंत बोला," हर बार आंखों देखा सच नहीं होता ज़हन , अगेन...... मैं खुद को खत्म करना पसंद करूंगा, पर तुम्हारी जगह किसी और को देना..... नेवर ज़हन .....! "
ज़हन चुपचाप उसे देखने लगी,उसकी सांसे तेज थी,दर्श आगे बोला," जिसने भी तुम्हारी जगह लेने की कोशिश की , मैंने उसे कभी जिंदा नहीं छोड़ा है, और आज भी वो जिंदा नहीं है, उसे उसकी जिंदगी से आजाद कर दिया है मैंने ज़हन, वो हमारे बीच कभी नहीं आ सकती , कोई भी नहीं आ सकती , मैं किसी को हमारे बीच आने नहीं दूंगा!"
ज़हन धीरे से बोली," तुम....ने मीरा को .... डॉक्टर मीरा को मार दिया?"
दर्श ज़हन की आंखों में देखते हुए बोला," उसने जो किया है, उसके बाद मौत ही उसकी सजा थी , हमारे बीच की दूरी की वजह थी वो ज़हन, she was providing me a wrong medicine..... मुझसे अपनी मां की मौत का बदला लेना चाहती थी वो .....मेरे करीब आकर.....!"
ज़हन की आंखों में अब जाकर गुस्से की जगह हैरानी आ गई , उसने दर्श के हाथ पर पकड़ ढीली की , और अपने हाथों की मुट्ठी बना ली, कुछ था जो उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था , उसके लिए सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था ।
दर्श फिर बोला," और मैंने उसे उसके खेल में मौत दे दी ..... मैंने उसे खत्म कर दिया ज़हन .....!"
ज़हन धीरे से बोली," दर्श.....!"
ज़हन की आँखें धीरे धीरे बंद हो रही थीं, उसकी आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा था, अचानक ही पूरी ताकत से वो उठी, और लगभग भागते हुए वॉशरूम की तरफ गई, दर्श तुरंत उठा और खुद भी ज़हन के पीछे आया।
ज़हन को vomiting हो रही थी , वो बड़ी मुश्किल से स्लैब पर हाथ रखे खड़ी हुई थी , दर्श ने एक नजर मिरर में उसे देखा और उसके बालों को पीछे से समेटते हुए उसे बेहद गौर से देखने लगा।
थोड़ी देर बाद , ज़हन ने जैसे तैसे अपना फेस वॉश किया, और पीछे मुड़कर स्लैब से ही टिक गई, ऐसा लग रहा था किसी ने उसकी बॉडी की एनर्जी पूरी तरह खींच ली हो , दर्श ने उसे कंधों से पकड़ा और उसके बाल जो पूरे चेहरे पर बिखर चुके थे , उन्हें साइड करते हुए बोला," are you okay zahan? "
उसकी आंखों में फिक्र थी, जो हमेशा ज़हन के लिए होती थी ।
ज़हन सिर उठाकर उससे कुछ बोलने को थी , पर कुछ ही पलों में वो निढाल होकर दर्श की बाहों में गिर चुकी थी, दर्श उसके गालों पर थपकी मारते हुए जल्दी से बोला," ज़हन.....open your eyes....!"
ज़हन की तरफ से कोई रेस्पॉन्स नहीं आया।
दर्श ने जल्दी से उसे उठाया और उसे लेकर बेडरूम में आया, ज़हन को बेड पर लेटा ने के बाद उसने जल्दी से कपड़े बदले।
वो जानता था ज़हन खून बर्दाश्त नहीं कर सकती, सबसे पहले ये जरूरी था, उसने खुद चेंज करने के बाद ही डॉक्टर को कॉल कर दिया।
और ज़हन के चेहरे पर जो थोड़ा बहुत ब्लड लग चुक था , उसे क्लीन करने लगा। उसकी नजर ज़हन के चेहरे से हट नहीं रही थी , उसका दिल तेजी से धड़क रहा था।
थोड़ी देर बाद, एक लेडी डॉक्टर ज़हन का चेकअप करने के लिए आई , वो ज़हन के बगल बेड पर बैठी हुई थी और दर्श बेड के पास ही हाथ बांधे खड़ा हुआ था, उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे ।
डॉक्टर ने ज़हन की पल्स चेक की और फिर उसका ब्लड प्रेशर, बाकी पैरामीटर्स देखने के बाद वो दर्श की तरफ मुड़ते हुए बोली," क्या आप बता सकते हैं इन्हें लास्ट पीरियड्स कब आए थे?"
दर्श कुछ पल रुककर बोला," 1 महीने पहले...!"
डॉक्टर ज़हन को देखते हुए बोली," इनकी कंडीशन मुझे ठीक नहीं लग रही , इन्हें देखकर लग रहा है कि इनकी बॉडी काफी वीक है, आपको प्रॉपर चेकअप के लिए एक बार इन्हें हॉस्पिटल लेकर आना होगा। "
बोलते हुए उनकी नजर पास ही रखे एक टेस्ट किट पर गई , जिसमें कुछ मिनट पहले ही उन्होंने ज़हन के ब्लड लिया था, टेस्ट करने के लिए।
दर्श ने उसकी बात सुनते हुए हां में सिर हिलाया और उसकी खुद की नजर उस कीट पर टिकी हुई थी।
कुछ मिनट बाद ही वो किट लेकर बेड से उठी और दर्श को देखते हुए बोली," I suspected she was pregnant, and the test came back positive Mr Aaryan, she is pregnant!"
बोलते हुए उनके होठों पर एक हल्की सी मुस्कुराहट आ गई थी।
उसकी बात सुनते हुए दर्श के एक्सप्रेशंस बिल्कुल बदल चुके थे , उसके हाथों की मुट्ठियां बन चुकी थी, वो उनकी बात सुनकर तुरंत बोला," नो......!"
उसका ये नो सुनते हुए ही उस डॉक्टर के चेहरे से मुस्कुराहट जा चुकी थी , वो हल्की हैरानी से दर्श को देख रही थी।
भला अपने ही बच्चे के आने पर कौन सा बाप खुश नहीं होगा , पर यहां दर्श का जो रिएक्शन था वो किसी को भी हैरान कर दे।
उसने एक गहरी सांस लेकर ज़हन को देखा और फिर बोला," मुझे ये बच्चा नहीं चाहिए....Is there any way to terminate the pregnancy?"
डॉक्टर कुछ पल शांत थी , उसके बाद वो दर्श को देखते हुए बोली," पर आपको एक बार मिसेज आर्यन से ....!"
दर्श बीच में ही बोला," जितना पूछा है उतना बताओ!"
उसकी आवाज सुनकर डॉक्टर बिल्कुल चुप हो गईं, वो फिर बोली ,"हम इसमें जल्दबाजी नहीं कर सकते, कल आप इन्हें एक बार हॉस्पिटल लेकर आयें, फिर चेकअप के बाद ही हम मेडिकल ऑप्शंस डिस्कस कर सकते हैं।"
दर्श ने हां में सिर हिलाया और बोला," anything else?"
कुछ और जरूरी सजेशंस देने के बाद डॉक्टर बेडरूम से बाहर निकल गई ।
दर्श ज़हन को देखते हुए उसके पास बैठा, और उसका हाथ अपने दोनों हाथों में लेते हुए उसे कसकर पकड़ लिया, वो एकटक उसे देखते हुए बोला," तुम इसके बारे में नहीं जान पाओगी ज़हन , मेरी वजह से, मेरी गलतियों की वजह से ऑलरेडी तुमने बहुत कुछ देख लिया, अब और नहीं ......we'll have a happy life togather, बस तुम और मैं, किसी और की कोई जगह नहीं है यहां, किसी तीसरे को हमारे बीच नहीं आने दे सकता ज़हन, मेरी ज़हन सिर्फ मेरी है , और मैं तुम्हारा.....किसी का कोई हक नहीं बनता कि हमारे बीच रहे , तुम ठीक हो जाओ, और फिर मैं किसी भी बुरी याद को तुम्हें छूने भी नहीं दूंगा ज़हन..... हम यहां से दूर चले जाएंगे!"
बोलकर उसने ज़हन के हाथ पर एक किस किया और अपने अंगूठे से धीरे धीरे उसका हाथ सहलाने लगा।
ये तो सच था कि उसका डिसऑर्डर पूरी तरह खत्म नहीं हो सकता , उसने खुद को कंट्रोल करना सीख लिया था , हर बात पर किसी की जान लेना छोड़ दिया था, पर उसका वो पागलपन जो ज़हन के लिए था , वो शायद ज़िन्दगी भर रहने वाला था , न ही वो ज़हन को किसी और के साथ बांटना चाहता था, न ही खुद से कभी दूर जाने देना चाहता था , उसका खुद का बच्चा ही बीच में क्यों न हो .....
वो उसी तरह बैठा था, की तभी किसी की आवाज उसके कानों में पड़ी ," ये सब मैं क्या सुन रहा हूं दर्श?"
दर्श का ध्यान तुरंत बेडरूम के गेट की तरफ गया, जहां रजत खड़े हुए थे , वो दर्श को ही देख रहे थे, फिर उनकी नजर बेड पर बेजान सी लेटी हुई ज़हन की तरफ गई।
वो अपने कदम बढ़ाते हुए बोले," ज़हन की तबियत खराब है ..... तुमने फिर से उस पर ध्यान देना बंद कर दिया है क्या या फिर उसे...?"
दर्श बेड से उठा और रजत के सामने आकर रुकते हुए बोला," मेरी ज़हन का ध्यान मैं रख सकता हूं, आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है!"
उसकी बात सुनकर रजत ने एक गहरी सांस ली और ज़हन की तरफ बढ़ते हुए बोले," उसकी खराब हालत मेरे सामने है , और तुम कहते हो मैं टेंशन न लूं, क्या हुआ है इसे ? इसकी ऐसी हालत.... फीवर नहीं लग रहा , डॉक्टर आई थी , कोई बड़ी बात होगी, काश मैंने इसे तुमसे बचा लिया होता दर्श.....तो आज इसकी ऐसी हालत नहीं होती .... तुमने क्या किया है इसके साथ? "
अपनी बात बोलते बोलते उनका लहज़ा सख्त हो चुका था, वहीं दर्श के जबड़े भींच गए थे, वो रजत को गुस्से से घूर रहा था, जैसे ही उन्होंने अपनी बात खत्म की वो एकदम से बोला," प्रेग्नेंट..... प्रेग्नेंट है मेरी ज़हन.....!"
उसकी टोन में एक इरीटेशन थी।
उसकी बात सुनकर रजत जो अबतक पैनिक होकर ये सब बोल रहे थे और पता नहीं क्या क्या सोच रहे थे , वो दर्श की बात पर थोड़ चौके, उन्हें लग जैसे उन्होंने गलत सुन लिया है।
वो एक बार फिर बोले," तुम....!"
दर्श बीच में बोला," मज़ाक नहीं करता.....!"
दर्श ने जैसे ही ये कहा रजत के होठों पर मुस्कुराहट आ गई, उन्होंने सोचा नहीं था चीजें बदलेंगी तो ऐसी बदलेंगी, प्रेग्नेंसी की बात सुनकर वो खुश हो चुके थे , ज़हन के लिए और दर्श के लिए भी ।
वो दर्श की तरफ मुड़े और उसके कंधे पर हाथ रखकर एक गहरी सांस लेकर बोले ," सच में नहीं सोचा था ऐसा दिन भी आएगा, पर तुम्हें पता है न जिंदगी क्या क्या दिखाती है, बहुत खुश हूं मैं तुम दोनों के लिए, ज़हन भी बहुत खुश होगी, ध्यान रखना.... अपना भी और ज़हन का भी !"
दर्श बिना किसी भाव के रजत को देख रहा था, रजत जैसे मुस्कुराते हुए उसे देख रहे थे , जैसे उससे बात कर रहे थे, एक पल के लिए उसके एक्सप्रेशन हल्के से बदले, पर उसने अपनी नजरें फेर लीं।
वो खुद से बोला," खुश ..... खुशी का नमो निशान नहीं है!"
वो सोच ही रहा था तभी उसके कानों में दोबारा रजत की आवाज पड़ी," वैसे मीरा काम कैसे कर रही है?"
उनकी बात पर दर्श की आँखें छोटी हो गई , अचानक उसके चेहरे पर एक तीखी सी मुस्कुराहट आ गई, वो गहरी सी आवाज में बोला," com'on dad..... आपको आपका बेटा इतना बेवकूफ लगता है..... आपको दर्श आर्यन बेवकूफ लगता है?"
रजत को दर्श की बात समझते हुए देर नहीं लगी, उनके चेहरे के भाव बिल्कुल बदल गए , वो जल्दी से बोले," तुमने कुछ किया तो नहीं उसके साथ?"
दर्श कुछ पल रुककर बोला," मेरी ज़हन की ये हालत सिर्फ उसकी वजह से है, और सबसे बड़ी बात , वो आशिमा तनेजा की बेटी थी, मुझसे बदला लेना चाहती थी, और मेरी ज़हन को मुझसे दूर करना चाहती थी......तो डैड, मीरा कपूर नर्क सिधार गई है.....!"
इतना बोलकर दर्श ने बेफिक्री से रजत को देखा, ऐसा लग रहा था जैसे वो बिल्कुल नॉर्मल सी बात बोल रहा हो , पर असल में वो ये बता रहा था कि उसने किसी को जान से मार दिया था, खैर, रजत के लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी , उन्हें इसकी आदत हो चुकी थी।
वो दांत पीसते हुए बोले," मुझे नहीं पता था ये सब , खैर तुमने किस्सा खत्म कर दिया है, तो कोई बात नहीं , ज़हन पर ध्यान दो अब !"
उन्होंने दोबारा दर्श के कंधे पर थपथाया, और बोले ," मैं एक इंटरनेशनल डील के डिस्कशन के लिए आया हूं.....!"
दर्श एक गहरी सांस लेकर बोला," मुझे थोड़ा टाइम चाहिए, आप गेस्ट रूम में रुक सकते हैं.....!"
रजत ने हामी भरी और ज़हन को एक नजर देखकर रूम से बाहर चले गए।
करीब 2 घंटे बाद, ज़हन ने धीरे धीरे अपनी आंखे खोली, वो चुपचाप सीलिंग को देखने लगी, उसके दिमाग में धीरे धीरे सारी चीजें चलने लगी , जो भी उसके और दर्श के बीच हुई थी, वो सीन जो उसने म्यूजिक रूम में देखा था, दर्श ने जो जो उससे कहा था, सब कुछ।
वो धीरे धीरे बेड से उठी , और अपने कदम गेट की तरफ बढ़ा दिए , उसके बाल पूरी तरह बिखरे हुए थे , आंखों में एक अजीब सा डर था ।
वो सीधे म्यूजिक रूम के बाहर आकर रुकी, गेट बंद था , उसने एक झटके से उसे खोला, और अन्दर देखने लगी।
सब कुछ बिल्कुल सही था , बिल्कुल शांति थी वहां, ऐसा कहीं से भी नहीं लग रहा था कि कुछ हुआ होगा यहां।
ज़हन खुद से ही बोली," दर्श ने उसे मार दिया था , वो यहीं होनी चाहिए थी , उसकी.....!"
वो आगे बोलती उससे पहले ही पीछे से किसी की धीमी सी आवाज आई," उसकी लाश देखना चाहती हो?"
ज़हन का दिल धक से रह गया , एक पल के लिए वो अंदर तक कांप गई थी, दर्श उसके बिल्कुल पास , ठीक उसके पीछे खड़ा था, उसका चेहरा ज़हन के कंधे के पास था ।
ज़हन ने हल्की सी गर्दन घुमाकर उसे देखा, दर्श उसे ही देख रहा था।
ज़हन धीरे से बोली," तुम... मुझे...मुझसे .....कुछ ... मतलब झूठ...!"
उसके मुंह से आवाज नहीं निकल पा रही थी, वो जो बोलना चाहती थी, उसे समझ नहीं आ रहा था की दर्श से कैसे बोले?
दर्श ने एकदम से उसे अपनी तरफ घुमाया और उसकी आंखों में देखते हुए बोला," उसकी लाश भी तुम्हे देखने को मिल जाएगी ज़हन , don't trust me.... मुझपर यकीन करने की जरूरत नहीं है , तुम्हारा शक भी देख सकता हूं मैं, तुम मुझ पर शक कर सकती हो, पर मेरी लॉयल्टी कहीं नहीं जाने वाली, वो कल भी थी और आज भी है, मेरी आखिरी सांस तक रहेगी......ज़हन , तुम्हारी जगह कोई और नहीं ले सकता .....!"
बोलते हुए उसने ज़हन का एक हाथ पकड़ा और उसे अपनी दिल वाली जगह पर रखते हुए बोला," मेरे दिल की धड़कने झूठ नहीं बोल सकती ज़हन .....!"
ज़हन ने अपनी आँखें बंद कर ली, उसकी आंखों में अब तक आंसू भर चुके थे, वो महसूस कर रही थी , दर्श की बढ़ी हुई धड़कने, उसकी आंखों की सच्चाई, उसे महसूस हो रहा था सब कुछ ।
वो एकदम से आँखें खोलकर दर्श के सीने से लग गई, दर्श ने उसे पूरी तरह खुद में समेट लिया , उसके होठों पर एक हल्की सी मुस्कुराहट आ गई, और एक सुकून भी ।
वो मन में ही बोला," देखा ज़हन..... सिर्फ तुम और मैं.... इसमें ही सुकून है, हमें किसी और की जरूरत नहीं है , वो एक चीज ....जो अभी सबसे ज्यादा जरूरी है, वो तुम्हें बताना होगा ज़हन, वो फीलिंग्स जो कितना भी दबाने की कोशिश करूं, बाहर आना नहीं छोड़ती, तुम्हारे लिए ज़हन !"
उसने आँखें बंद कर लीं तभी उसे अपने चेस्ट पर हल्का सा दर्द हुआ, उसने तुरंत आँखें खोलकर देखा, तो ज़हन उसके सीने पर मुक्के मार रही थी।
वो उसी तरह बोली," तुम मुझे अपना प्लैन बता सकते थे न दर्श, क्यों मुझे नहीं बताया तुमने? मुझे रोते देखकर तुम्हें अच्छा लग रहा था क्या ? "
दर्श उसके बालों में उंगलियां फसाते हुए बोला," तुम्हारे एग्जाम्स चल रहे थे न ......और तुम्हें स्ट्रेस नहीं देना था उसकी वजह से, तुम वो सब कैसे हैंडल करती ?"
ज़हन धीरे से बोली," जो स्ट्रेस मुझे मिला था पूरे टाइम, उससे तो कम ही होता न दर्श...!"
दर्श ने सिर झुकाकर दर्श को देखा, उसकी बातें सच थी , वो अब भी उसके सीने से लगी हुई थी ।
दर्श उसके सिर पर एक किस करते हुए बोला," ओके..... I'm sorry ज़हन, माफ कर दो ..... मेरी गलती!"
ज़हन उससे अलग हुई और हल्का सा धक्का देते हुए बोली," हां तुम्हारी ही गलती है, इतनी गलतियां करते हो .....मुझे भूख लगी रही है!"
दर्श के होठों पर एक दिलकश मुस्कुराहट आ गई, वो ज़हन से अपनी नजरें नहीं हटा पा रहा था, वो हल्के गुस्से में थी , हर चीज सच बोल रही थी, दर्श को वो सच में क्यूट लग रही थी।
वो उसके चेहरे पर झुकते हुए बोला," तो तुम चाहती हो मैं कुछ बनाऊं?"
ज़हन ने उसकी आंखों में देखा और बिना कुछ बोले धीरे से हां में सिर हिला दिया।
दर्श एकदम से मुस्कुराया और उसे गोद में उठाते हुए बोला," as you wish.... मेरी ज़हन!"
वो दोनों नीचे आए और कुछ ही देर में दर्श ने अपना काम शुरू कर दिया था, ज़हन स्लैब पर बैठी हुई थी, उसका पूरा ध्यान फोन पर था, दर्श के ही फोन में स्क्रोल कर रही थी, दर्श की तरफ से उसका ध्यान पूरी तरह हट चुका था।
दर्श अपना काम करते हुए बार बार उसे देख रहा था, अचानक ही उसने उसके हाथ से फोन लिया और उसे देखते हुए बोला," आईज ऑन मि ज़हन....मुझे देखो!"
ज़हन कुछ पल रुककर बोली,"मैं तुम्हें अपनी मर्जी से देखूँगी जब मेरा मन करेगा, तुमने मुझे अपनी मर्जी से कुछ नहीं बताया था न , मैं भी अपनी मर्जी से देखूँगी अब फोन दो .....!"
दर्श अपने बालों पर हाथ फेरते हुए बोला," मतलब तुम मुझसे अब भी गुस्सा हो !"
ज़हन फोन लेने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए बोली," हां तो ?"
दर्श ने कुछ पल उसके चेहरे को देखा, उसका मूड कही से भी ठीक नहीं लग रहा था , जो चमक वो उसकी आंखों में देखना चाहता था, वो नहीं था , वो बुझी बुझी सी लग रही थी, दर्श ने एक गहरी सांस लेकर उसे फोन वापस किया और अपना काम करने लगा, स्लैब पर ही एक आईपैड रखा हुआ था, हर तरह की डिशेज नहीं बनानी आती थी उसे, तो वीडियोज से हेल्प ले रहा था वो ।
थोड़ी देर बाद, सब रेडी हो चुका था , दर्श ज़हन को लेकर ऊपर जा चुका था , बाकी दिशा सारी चीजें ऊपर लेकर जाने वाली थी।
दर्श ने जैसे ज़हन को बेड पर बैठाया, ज़हन ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया , वो दर्श को देखते हुए बोली," तुम तो बिज़नेस ट्रिप पर जाने वाले थे न दर्श ?"
दर्श ने एक बार ज़हन के हाथ को देखा और उसके गाल पर हाथ रखकर बोला," hm.... जाना था , पर कल शाम को जाना है , हम दोनों को , तुम्हारा मूड ठीक करना पड़ेगा न, इसलिए हमारी एक ट्रिप....what say ?"
ज़हन के होठों पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गई , पर वो अचानक बोली," पर तुम्हारा काम?"
दर्श कुछ पल रुककर बोला," don't worry about it.... वो मैं देख लूँगा!"
ज़हन ने हां में सिर हिलाया, और दर्श वॉशरूम की तरफ बढ़ गया ।
ज़हन के दिमाग में कई सारी बातें चलने लगी थी, वो खुद से ही बोली," कितना अजीब लगता है मुझे? और मीरा , उसका तो जैसे नामोनिशान मिट चुका है, क्या से क्या हो गया एक पल में....पर जो भी हुआ अच्छा हुआ , लेकिन मैं खुश क्यों नहीं हूं? मुझे क्या हो गया है ?"
बोलते हुए उसने अपने सिर पर हाथ रख लिया ।
ऐसा नहीं था प्रेग्नेंसी के सारे सिंप्टम्स एक ही दिन में आने लगे थे , कुछ चीजें ज़हन ने नोटिस भी नहीं की थी , अर्ली प्रेग्नेंसी सिंप्टम्स दिखने लगे थे ।
थोड़ी देर बाद दर्श आया , तो खाना भी लग चुका था ।
वो ज़हन के पास बैठा और उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला," खाने के बाद गुस्सा करना ....!"
ज़हन अब तक उसकी गोद में आ चुकी थी, वो ठीक से बैठते हुए बोली," मैं वैसे भी तुम्हारे हाथों से खाने वाली थी ....!"
दर्श ने उसे आँखें छोटी करते हुए देखा और बोला," रियली?"
ज़हन ने तुरंत हां में सिर हिलाया और खाने की तरफ देखने लगी, Creamy Alfredo pasta था उसके सामने, जिसे देखते हुए उसके मुंह में पानी आ रहा था ।
दर्श ने एक बाइट खिलाया और उसका रिएक्शन देखने लगा, वो धीरे से बोली," wow दर्श....!"
दर्श ने खुद एक बार खाते हुए बोला," hmm, अच्छा तो है.... तुम्हारी तरह!"
ज़हन ने हल्का सा उसके कंधे पर मारा और उसे देखते हुए बोली," मैं नहीं मान रही तुम्हारी बातें, झूठे कहीं के !"
उसकी बात सुनते हुए दर्श ने एक बाइट फिर खिलाया, और हल्का सा सिर टेढ़ा करते हुए बोला," मैं झूठा ज़हन......?"
ज़हन उसके सीरियस टोन को देखते हुए धीरे से बोली," i mean.... हां, हो तुम!"
वो एक पल के लिए डर गई थी उसे देखते हुए, पर उसे अच्छे से पता था , दर्श कुछ भी नहीं करने वाला था।
दर्श उसके चेहरे पर झुकते हुए धीरे से बोला," you are talking too much....punishment चाहिए क्या ?"
ज़हन ने उसे हल्का सा धक्का दिया और उसके हाथ से चम्मच लेकर खुद खाते हुए बोली," तुम डरा रहे हो मुझे, देखो कितने चेंज हो चुके हो , मेरी गलतियां निकालते हो तुम, इतने कैसे बदल गए दर्श?"
दर्श के पास अब कोई जवाब नहीं था , वो तो बस ज़हन का थोड़ा नर्वस रिएक्शन देखना चाहता था, पर वो उल्टा ही कर रही थी।
दर्श हल्का सा मुस्कुराया और उसके चेहरे को दोनों हाथों से पकड़कर बोला," मैं नहीं बदल सकता ज़हन.....जो चीजें हुई हैं, उन्हें भी नहीं , पर मेरे लिए सही तुम हमेशा रहोगी, तुम अब भी मेरे लिए भी हो , गलत कभी नहीं हो सकती तुम, वैसे अब तुम मुझसे सच में नहीं डरती?"
ज़हन ने तुरंत न में सिर हिलाया और एक बाइट दर्श को खिलाते हुए बोली," नहीं डरती अब मैं तुमसे..... और सही रहने की आदत पड़ चुकी है मुझे तुम्हारी वजह से!"
दर्श ने एक सेटिस्फेशन से उसके पूरे चेहरे को देखा और उसके चेहरे के बिल्कुल पास अपना चेहरा करते हुए बोला," ये भी गलत नहीं हो सकता .....!"
बोलते हुए उसने धीरे से ज़हन को लिप्स को कैप्चर कर लिया, ज़हन का एक हाथ उसके कंधे पर आ चुका था , वो पलकें झपकाते हुए दर्श को देख रही थी, जो धीरे धीरे उसे किस कर रहा था , ज़हन का दिल तेजी से धड़क रहा था।
काफी सारी फीलिंग्स थी उस किस में , इतने दिनों से उन दोनों के बीच जो दूरियां थी , वो खत्म हो रही थी , उस किस में , ज़हन ने भले ही दर्श को उसकी माफी नहीं दी थी , वो अब भी थोड़ी नाराज थी उससे, लेकिन वो दर्श को खुद से दूर भी नहीं कर पा रही थी , या कह सकते हैं वो करना भी चाहती थी।
वो दोनों किस कर ही रहे थे, की अचानक ज़हन के एक्सप्रेशंस हल्के से बदले, उसे बहुत अजीब सी फीलिंग आ रही थी।
उसने तुरंत दर्श को धक्का दिया, और तेज कदमों से वॉशरूम की तरफ भागी ।
एक बार फिर से वॉमिटिंग हो रही थी उसे , दर्श तुरंत उसके पीछे आया , और मिरर में उसे देखने लगा, उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे , उसने ज़हन की हेल्प की , और थोड़ी देर बाद उसका फेस टॉवल से क्लीन करने लगा ।
ज़हन उसे देखते हुए धीरे से बोली," मेरी तबियत खराब हो गई है क्या दर्श?"
दर्श के हाथ रुक गए, वो चुपचाप ज़हन को देखने लगा, दर्श का दिल एकदम तेजी से धड़कने लगा था, ज़हन की इनोसेंस, वो चाहकर भी इग्नोर नहीं कर पा रहा था, उसने उसके गाल पर हाथ रखा और उसकी आंखों में देखते हुए बोला," कल हम हॉस्पिटल जाएंगे....ठीक है, don't worry about it..... तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा, प्रॉमिस..... मुझे तुम्हारे साथ रहना है ज़हन, तुम्हें कुछ कैसे होने दे सकता हूं....!"
बोलते हुए उसने ज़हन के फ़ोरहेड पर अपन होठ रख दिए, ज़हन की आँखें अपने आप बंद हो गई , उसे फील हो रहा था , दर्श कितना deeply ये बोल रहा था, ऊपर से उसकी आँखें, उनमें एक डर था , ज़हन को खोने का ।
ज़हन के होठों पर एक हल्की सी मुस्कुराहट आ गई ।
To be continued.....
Really sorry for the late update. Thank you for waiting! I hope you enjoyed this chapter. Don't forget to share your thoughts in the comments. See you in the next one!
Love you cubbies 🎀
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